नागरिक-केंद्रित वाटरशेड विकास सुधारों को सीधे ग्रामीण समुदायों तक पहुंचाने के लिए राज्य सरकार, भारत सरकार के सहयोग से ग्रामीण क्षेत्रों में 'रिफॉर्म उत्सव' का आयोजन करने जा रही है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य जन-जागरूकता, सामुदायिक सहभागिता और स्थानीय स्वामित्व को सुदृढ़ कर वाटरशेड विकास को एक 'जन आंदोलन' का रूप देना है।
इस अभियान को जन योजना अभियान (PPC) 'सबकी योजना, सबका विकास' के साथ एकीकृत किया गया है, जिसकी शुरुआत 2 अक्टूबर, 2026 से ग्राम सभाओं के माध्यम से होगी। इसके तहत राज्य की 91 वाटरशेड विकास परियोजनाओं के अंतर्गत आने वाली लगभग 727 ग्राम पंचायतों में सुधारों और तकनीकी जानकारियों का प्रसार किया जाएगा। इसके उपरांत राज्य, जिला तथा 40 परियोजना-स्तरीय स्थानों पर भी उत्सव की विशेष गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।
कार्यक्रम के अंतर्गत किए गए प्रमुख नीतिगत सुधारों से किसानों को त्वरित व प्रभावी लाभ मिल रहा है। विकास कार्यों की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए मैदानी क्षेत्रों में वित्तीय आवंटन 12 हजार रूपये से बढ़ाकर 22 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर तथा पहाड़ी व कठिन क्षेत्रों में 15 हजार रूपये से बढ़ाकर 28 हजार रूपये प्रति हेक्टेयर किया गया है।
साथ ही, कार्य को गति देने के लिए परियोजना की अवधि 7 वर्ष से घटाकर 5 वर्ष कर दी गई है। राष्ट्रीय स्तर पर विगत 12 वर्षों में लगभग 3.4 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र को कवर किया गया है, जिसके फलस्वरूप भूजल स्तर में 3 मीटर तक की वृद्धि, कृषि क्षेत्र में 30% और किसानों की आय में 70% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
राज्य में इस योजना के तहत 67 कृषक सुविधा सह कस्टम हायरिंग सेंटर और 75 एफपीओ स्थापित किए गए हैं। पर्यावरण संरक्षण के लिए 67 हेक्टेयर में मियावाकी पद्धति तथा 3,793 हेक्टेयर क्षेत्र में वृक्षारोपण किया गया है। क्लस्टर आधारित सब्जी उत्पादन से वर्ष 2025 में खरीफ के 3 हजार से अधिक और रबी के 6 हजार से अधिक किसान लाभान्वित हुए हैं।
जल संरक्षण के लिए राज्य में 447 अमृत सरोवर, 355 सामान्य तालाब, 622 खेत तालाब, 1,236 चेकडेम/स्टॉप डेम, 3,690 गेबियन और 2,347 कंटूर ट्रेंच जैसी संरचनाओं का निर्माण किया गया है। 'रिफॉर्म को फाइल से लाइफ तक' पहुँचाने का यह अभियान विकसित भारत @2047 के अंतर्गत सूखा-मुक्त और समृद्ध गाँव निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

