जनजातीय प्रकोष्ठ द्वारा वन अधिकार अधिनियम के तहत सामुदायिक वन संसाधन अधिकार सीएफआरआर के संबंध में एक अंतरविभागीय हाइब्रिड कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें कलेक्टर कार्यालय के एनआईसी कक्ष से कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल, अपर कलेक्टर श्री अविनाश रावत, डीएफओ, सहायक आयुक्त वन सहित प्रदेश के सभी जिलों के कलेक्टर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े।
कार्यशाला में वन संरक्षण में जनजातीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित करने, वन अधिकार दावों का शीघ्र निराकरण कर पात्र हितग्राहियों को पट्टों का वितरण करने तथा पोषणीय नीति के तहत व्यक्तिगत और सामुदायिक वन अधिकार प्रदान करने पर विस्तृत चर्चा की गई।
इस दौरान अध्यक्ष जनजातीय प्रकोष्ठ ने समस्त कलेक्टर्स को निर्देशित किया कि जिन वन क्षेत्रों में वन्य जीवों का आवागमन होता है, ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों को छोड़कर अन्य सभी वन क्षेत्रों में वन अधिकार दावों के क्रियान्वयन को प्राथमिकता दी जाए।
यह कार्यशाला अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परंपरागत वनवासियों के अधिकारों, गरिमा एवं आजीविका की बहाली तथा अधिनियम के अंतर्गत वन संसाधनों पर उनके उचित स्वामित्व के माध्यम से जनजातीय समुदायों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से आयोजित की गई। कार्यशाला में अधिनियम के कार्यान्वयन को मजबूत करने, सभी मान्यता प्राप्त वन अधिकारों, जिसमें व्यक्तिगत वन अधिकार, समुदाय अधिकार एवं समुदाय वन संसाधन अधिकार शामिल हैं, के लिए महत्वपूर्ण चुनौतियों एवं समाधानों पर विचार-विमर्श किया गया।
कार्यशाला में एफआरए की धारा 3(1)(प) एवं 5 के अंतर्गत समुदाय वन शासन को क्रियान्वित करने तथा ग्राम सभाओं एवं सीएफआर प्रबंधन समितियों को मजबूत करने पर जोर दिया गया। पैनलिस्टों ने बताया कि एफआरए पूर्व-विद्यमान अधिकारों को सौंपने का प्रावधान करता है।
कार्यशाला में पैनलिस्टों ने समस्त कलेक्टर्स से अपील करते हुए वन अधिकार अधिनियम के तहत जनजातीय समुदायों को प्राप्त अधिकारों के प्रचार-प्रसार करने एवं ग्राम सभाओं में अधिनियम के तहत प्रदत्त अधिकारों को समुदायों के बीच पढ़कर सुनाने को कहा गया।

