मध्यप्रदेश के सिवनी जिले के कुरई विकासखंड अंतर्गत ग्राम खापा की रहने वाली श्रीमती कृष्णा पटले आज ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता की एक सशक्त मिसाल बन चुकी हैं। कभी घर-गृहस्थी की सीमित जिम्मेदारियों के बीच आर्थिक तंगी से जूझने वाली कृष्णा ने खुद का काम शुरू कर अपनी तकदीर बदलने की ठानी और आज वे सफलता की नई इबारत लिख रही हैं।
आजीविका मिशन से मिला नया संबल कृष्णा पटले बताती हैं कि उनके जीवन में बदलाव की शुरुआत तब हुई जब वे राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गठित ‘जय मां दुर्गा आजीविका स्वयं सहायता समूह’ से सदस्य के रूप में जुड़ीं। समूह की बैठकों में शामिल होकर उन्हें बचत और स्वरोजगार के विभिन्न अवसरों की जानकारी मिली, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा।
ऋण सहायता से शुरू किया बकरी पालन अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए उन्होंने समूह के माध्यम से कैश क्रेडिट लिमिट (CCL) के तहत 1 लाख रुपये की ऋण राशि प्राप्त की। इस राशि का सदुपयोग करते हुए कृष्णा ने गांव में व्यवस्थित रूप से बकरी पालन गतिविधि शुरू की।
बकरी पालन के व्यवसाय से कृष्णा पटले की मेहनत रंग लाई और उनके परिवार की आजीविका में उल्लेखनीय सुधार आया। इस कार्य से उन्हें नियमित आमदनी प्राप्त होने लगी, जिससे वे न केवल अपने घर की आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से पूरा कर पा रही हैं, बल्कि व्यवसाय से होने वाले मुनाफे से समूह की छोटी-छोटी किश्तों के रूप में ऋण राशि भी समय पर चुका रही हैं।
शासन और आजीविका मिशन के प्रति आभार अपनी सफलता और जीवन में आए सकारात्मक बदलाव से उत्साहित कृष्णा पटले कहती हैं कि समूह से जुड़कर उन्हें न सिर्फ पहचान मिली है बल्कि वे आर्थिक रूप से भी आत्मनिर्भर बनी हैं। वे ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने के इस प्रयास के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन का हृदय से धन्यवाद ज्ञापित करती हैं।



